Sunday, October 8, 2017

दीपावली पूजा विधि, दीपावली पर माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 21 कारगर उपाय, दीपावली शुभ मुहूर्त और मंत्र के जाप

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लक्ष्मी कृपा पाने के लिए ज्योतिषियों के बताए 21 उपाय यहां दिए जा रहे हैं, इन्हें सभी राशियों के लोग कर सकते हैं। इनमें से कोई भी एक या अधिक उपाय करने से दरिद्रता दूर होकर सुख-सम्पत्ति का आगमन होता है।
1-दीपावली की रात में लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें और यहां दिए एक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्यधिपतये धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा
2-दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता बाहर चली जाती है। मां लक्ष्मी घर में आती हैं। 
3- दीपावली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। किसी मंदिर हनुमान मंदिर जाकर ऐसा दीपक भी लगा सकते हैं। 
4- किसी शिवमंदिर जाएं और वहां शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ध्यान रहें सभी चावल पूर्ण होने चाहिए। खंडित चावल शिवलिंग पर चढ़ाना नहीं चाहिए।
5- दीपावली पर महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां भी रखनी चाहिए। ये कौडिय़ा पूजन में रखने से महालक्ष्मी बहुत ही जल्द प्रसन्न होती हैं। आपकी धन संबंधी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी। 
6- लक्ष्मी पूजन के समय हल्दी की गांठ भी साथ रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां धन रखा जाता है। 
7- दीपावली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें। जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखना चाहिए। 
8- दीवाली के दिन किसी मंदिर में झाड़ू का दान करें। यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का दान करें।
9- इस दिन अमावस्या रहती है और इस तिथि पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोष और कालसर्प दोष समाप्त हो जाते हैं। 
10- दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन करने के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। इस लग्न में पूजा करने पर महालक्ष्मी स्थाई रूप से घर में निवास करती हैं। पूजा में लक्ष्मीयंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र रखना चाहिए। यदि स्फटिक का श्रीयंत्र हो तो सर्वश्रेष्ठ रहता है। 
11- अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय दीपावली की रात में किया जाना चाहिए। ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आए, वापिस पलटकर न देखें।
12- दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें। 
13- दीपावली की रात में लक्ष्मी पूजन के साथ ही अपनी दुकान, कम्प्यूटर आदि ऐसी चीजों की भी पूजा करें, जो आपकी कमाई का साधन हैं। 
14- लक्ष्मी पूजन के समय एक नारियल लें और उस पर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि अर्पित करें और उसे भी पूजा में रखें। 
15- दीपावाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है।
16- प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। दीपावली के शुभ दिन यह उपाय करने से गणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। 
17- दीवाली की रात सोने से पहले किसी चौराहे पर तेल का दीपक जलाएं और घर लौटकर आ जाएं। ध्यान रखें पीछे पलटकर न देखें। 
18- महालक्ष्मी के चित्र का पूजन करें, जिसमें लक्ष्मी अपने स्वामी भगवान विष्णु के पैरों के पास बैठी हैं। ऐसे चित्र का पूजन करने पर देवी बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं। 
20- दीपावली के दिन यदि संभव हो सके तो किसी किन्नर से उसकी खुशी से एक रुपया लें और इस सिक्के को अपने पर्स में रखें। बरकत बनी रहेगी। 
21- दीपावली के दिन घर से निकलते ही यदि कोई सुहागन स्त्री लाल रंग की पारंपरिक ड्रेस में दिख जाए तो समझ लें आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है। यह एक शुभ शकुन है। ऐसा होने पर किसी जरूरतमंद सुहागन स्त्री को सुहाग की सामग्री दान करें।

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Saturday, October 7, 2017

करवा चौथ व्रत,करवा चौथ व्रत विधि और पूजा विधि, करवा चौथ व्रत की संपूर्ण प्रामाणिक कथा



बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।
शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।
सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो।
इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।
वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।
उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।
सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।
एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।
इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है।
सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।
अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है।
करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश- मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।
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Sunday, September 10, 2017

नवग्रह अंगूठी, नवरत्न अंगूठी लाभ, नवरत्न अंगूठी पहने नियम



नव रत्न रिंग आपके राशि चिन्ह या जन्मकुंडलीके आधार पर या नव रत्न रिंग को चुनना चाहती है जिसमें नौ पत्थरों के सभी 9 ग्रहों का प्रतिनिधित्व होता है। नव रत्न 9 ग्रहों से संबंधित नौ रत्न शामिल हैं ।

नव रत्न अंगूठी ज्योतिषीय उपायों के तहत, एक रत्न अंगूठी पहन सकते हैं उनके राशि या जन्म कुंडली पर आधारित है। नवरतनवेदिक ज्योतिष में उपयोग किए गए नौ ग्रहों से संबंधित नौ रत्नों को संदर्भित करता है। यदि कुंडली में अधिक ग्रह कमजोर हों तो नवग्रह रत्न अंगूठी को दाएं हाथ की अनामिका में रविवार की सुबह धारण करेंनव रत्न शुभ माना जाता है और मानाजाता है कि जो कोई भी इसे पहनता है वह अच्छे स्वास्थ्य लाएगा। यह स्वास्थ्य, समृद्धि, खुशी और मन की शांति का प्रतीक है। इसके अलावा, यह नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के प्रभाव को छोड़ देता है, जबकि रत्नों के सकारात्मक प्रभाव को मजबूत करता है।


नवरत्न के गहने अंगूठी किसी के द्वारा पहना जा सकता है और इसमें कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं है। यह सभी के अनुरूप है, चाहे उनके राशि चिन्ह पर ध्यान दिए बिना, और एक ज्योतिषी की सिफारिश के बिना पहना जा सकता है।

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Thursday, September 7, 2017

एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि, 1 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, एकमुखी रुद्राक्ष की पहचान



एक मुखी रूद्राक्ष व्यक्तिगत शक्ति, समृद्धि देता है। 1 मुखी रूद्राक्ष एकाग्रता की शक्ति और आंतरिकशांति प्रदान करता है। नेपाली एक मुखी रूद्राक्ष नेतृत्व गुणों को भी तनावपूर्णस्थितियों पर काबू पाने के लिए कौशल देता है। एक मुखी रूद्राक्ष सभी मुखी रूद्राक्षों में सबसे नायाब है। एक मुखी रूद्राक्ष पहनने वाला व्यक्ति सभी संसारिकसुखों का आनंद लेता है, फिर भी उनसे अलग रहता है। एक मुखी रूद्राक्ष के श्रोता बहुत आध्यात्मिक शक्तियों, राजनीतिक शक्तियों को प्राप्त करते हैं। एक मुखीरूद्राक्ष का पहनने वाला राजनीति में सर्वोच्च स्थान तक पहुंच सकता है।

एक मुखी रुद्राक्ष आधा चाँद आकार रुद्राक्ष है। एक मुखी रुद्राक्ष पूजा के दिन या शरीर में पकड़ आत्मविश्वास और असीम ऊर्जा की ओर जाता है लोगों को मन की अच्छी भावना है एक मुखीरूद्राक्ष का मानना ​​है कि शरीर में विभिन्नप्रकार के अवरोधों से छुटकारा मिल सकता है जैसे हार्ट अटूट भूत बाधा, आकस्मिकआपदाएं

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काल सर्प दोष निवारण यंत्र, कालसर्प दोष के लक्षण, कालसर्प दोष कैसे पाएं मुक्ति, कालसर्प दोष निवारण पूजा


काल सर्प योग पूजा भी कई ज्योतिषियों और विभिन्न मूलभूत ज्योतिषशास्त्रों में दिलचस्पी के रूप में कई गलतफहमी की ओर जाता है और इस पूजा को अलग-अलग तरीके से करते हैं। काल सर्प दोष तब बनता है जब सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आते हैं । जो व्यक्ति इस योग से जन्म लेता है वह विभिन्न समस्याओं जैसे बच्चे की समस्याएं, व्यवसाय में हानि, परिवार कीसमस्याओं आदि से ग्रस्त है। काल सर्प योग की पूजा करने के लिए बुलाओ शास्त्रोंमें तो स्पष्ट लिखा है कि सोमवती अमावस्या और नागपंचमी के दिन ही कालसर्प दोष निवारण की पूजा सम्पन्न करनी चाहिए ।सामान्यतः कालसर्प योग को अत्यन्त खराब बताया गया है लेकिन कालसर्प योग वाला व्यक्ति जीवन में अचानक लाभ भी प्राप्त करता है।
काल सर्प योग निवारण पूजा काल सर्प योग का बुरा प्रभाव कम करती है | इस योग के साथ लोगों को संघर्ष से भरा जीवन मिलता है । इससे जीवन में असफलता उत्पन्न होती है और हर नौकरी की उपलब्धि में बाधा उत्पन्न होती है| आप इस योग के बुरे प्रभावों से स्वयं को बचाने के लिए चाहते हैं कालसर्प योग पूजा  नाग पंचमी की पूजा करते हैं और साथ ही इस योग के बुरे प्रभावों से स्वयं को बचाने के लिए काल सर्पदोष निवारण यंत्र पहनते हैं।

काल सर्प मंत्र- ओम भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।। 

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Wednesday, September 6, 2017

वास्तु दोष निवारक यंत्र, वास्तु दोष निवारण यंत्र इन हिंदी, संपूर्ण वास्तु दोष निवारक यंत्र आसान उपाय, वास्तु दोष दूर करने के उपाय



वास्तुदोष निवारण यंत्र, दोषों के दैवीय समाधान या वास्तु पर नकारात्मकप्रभाव डालता है या घर और कार्यालय का निर्माण करता है। वास्तु दो निर्माण, निर्माण में गलतियों की दिशा में, पूरे भवन के प्रत्येक भाग की दिशा, स्थान औरराज्य के आधार पर सिद्धांतों और सिद्धांतों के अनुसार दर्शाता है। इससे आसपास के क्षेत्र में कई समस्याएं आ सकती हैं क्योंकि यह कुछ भी बढ़ने नहीं देगा और रास्तेमें बाधाएं पैदा करने के साथ-साथ प्रतिकूल प्रभावों को छोड़ देगा, वस्तू के पहलुओं और वास्तु यंत्र आजकल हर किसी के जीवन में एक महत्वपूर्ण पहलू है। 

वास्तुशोधनतंत्र किसी भी भवन के वास्तु में दोषों के कारण होने वाली हानिकारक प्रभावों का सामना करने के लिए एक शक्तिशाली यंत्र है। वास्तु शास्त्र एक विज्ञान है जो हमें घरों और कार्यस्थल पर सामग्री समृद्धि, मानसिक शांति, खुशी और सद्भाव संतुलन प्राप्त करने में मदद करता है। यदि मकान, आफिस या दुकान में कहीं वास्तु दोष हो तो वास्तु दोष निवारकयंत्र सामग्रियों का उपयोग कर वास्तु दोष का निवारण किया जा सकता है। वास्तु देवता को प्रसन्न एवं संतुष्ट करने के लिए अनेक उपाय किये जाते हैं जिनमें संपूर्ण वास्तु दोष निवारक यंत्र सरल एवं उपयोगी उपाय है. संपूर्ण वास्तु दोष निवारक यंत्र को स्थापित करने से वास्तु से संबंधित सभी दोषों का निवारण किया जा सकता है|

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Tuesday, September 5, 2017

श्री यंत्र पूजा, क्रिस्टल श्री यंत्र, स्फटिक श्री यंत्र स्थापना, श्री यंत्र मंत्र, श्री यंत्र दैनिक पूजन विधि

स्फटिक श्रीयंत्र सबसे उपयुक्त यंत्र में से एक है, महत्वपूर्ण और शक्तिशाली, न केवल लाभ को अधिकतम करने के लिए, बल्कि लगभग सभी के लिए भी फायदेमंद है। स्फटिक श्री यंत्र के नाम से जाने जाने वाले क्रिस्टल को मन, शरीर और आत्मा के लिए असाधारण चिकित्साऊर्जा कहा जाता है। यह सर्वोच्च ऊर्जा का स्रोत माना जाता है और ऊर्जा तरंगों और किरणों के रूप में तत्व का एक और रूप है। क्रिस्टल में सकारात्मक सकारात्मक कंपन हैं, जो ऊर्जा देता है, आपके भावनात्मक जीवन को फिर से जीवंत करता है और स्पष्टता देता है और आपको अधिक सहज ज्ञान युक्त बनाता है। क्रिस्टल श्री यंत्र की सकारात्मक कंपनें मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करती हैं। यह एक बहुत शक्तिशाली यंत्र है

स्फटिक श्री यंत्र निश्चित रूप से हमारे जीवन में सभी समस्याओं और नकारात्मकता का उत्तर है। जो कोई भी क्रिस्टल श्री श्री यंत्र का उपयोग करता है वह बहुत अधिक समृद्धि, शांति और सामंजस्य प्राप्त करता है क्रिस्टल श्री यंत्र हमारे जीवन में सभी बाधाओं को तोड़ने में मदद करता है इससे हमें अनिश्चित काल तक और आसानी से विकास की सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है - दोनों आध्यात्मिक और भौतिक रूप से। हमारे चारों ओर नकारात्मक ऊर्जा अधिक या कम है यह नकारात्मक ऊर्जा अधिक सफलता, समृद्धि, शांति और सामंजस्य को प्राप्त करने के हमारे रास्ते में है|

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Saturday, September 2, 2017

पूजा कराने वाले पंडित, काल पंडितजी, पंडितजी पूजा के लिए आर्डर करे




हमारे यहाँ सभी प्रकार की पूजा पाठ का कार्य विद्वान एवं अनुभवी पंडितो के द्वारा संपन्न किया जाता है हवन, अनुष्ठान, विवाह, सगाई, भागवत कथा, महामृत्युंजय जप, नवग्रहों के जप आदि समस्त प्रकार की पूजा पाठ का कार्य संपन्न किया जाता है
यदि आप भी हमारे द्वारा पूजा पाठ हवनअनुष्ठानभजन, कीर्तन, आरतीविवाह, सगाई, भागवत कथा, महामृत्युंजय जप, नवग्रहों के जप आदि समस्त प्रकार की पूजा करवाना चाहते है तो कृपया कम से कम 10 दिन पहले अग्रिम बुकिंग कर हमे सूचित करें.


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